धर्म-संस्कृति · काशीपुररुद्रपुर सिटी रिपोर्ट
काशीपुर में द्रोण सागर के पास 90 एकड़ के टीले पर एएसआई ने फिर शुरू की खुदाई, मार्च तक चलेगी; महाभारत और ह्वेनसांग के 'गोविषाण' से जोड़ा जाता है यह स्थल

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने काशीपुर में द्रोण सागर के पास 90 एकड़ में फैले टीले पर इसी सप्ताह फिर से खुदाई शुरू की है, जो मार्च तक चलने की उम्मीद है। स्थानीय मान्यता है कि महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य यहीं पांडवों को शिक्षा देते थे और पांडवों ने गुरु दक्षिणा में द्रोण सागर बनवाया था। इतिहासकार इसे छठी सदी में आए चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत में दर्ज 'गोविषाण' मानते हैं; अलेक्जेंडर कनिंघम ने भी यही पहचान की थी और टीले के सबसे ऊंचे हिस्से भीम-गजा में एक विशाल इमारत के अवशेष खोजे थे। एएसआई 1939-40, 1965-66 और 1970-71 में यहां खुदाई कर चुका है, जिसमें गुप्त काल से शुरुआती मध्यकाल तक के मंदिर के अवशेष मिले। हाल की खुदाई में ईंटों की संरचनाएं और एक गोलाकार आकृति मिली है। एएसआई देहरादून मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मोहन जोशी के मुताबिक इस बार मकसद पहले मिली चीजों के वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना और गहराई तक खोदकर अलग-अलग कालखंडों की गतिविधियां समझना है। (स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, जनसत्ता)