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पंतनगर विवि की छिलका रहित जौ ‘पंत जौ-1121’ मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद, 12 राज्यों में उगाने की मंजूरी
Pantnagar university's hull-less barley 'Pant Jau-1121' beneficial for diabetics, cleared for cultivation in 12 states

जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड की पहली छिलका रहित जौ की प्रजाति पंत जौ-1121 विकसित की है। भारत सरकार की सेंटर वैरायटी रिलीज कमेटी ने अगस्त में इसे उत्तर पूर्वी जोन के 12 राज्यों में उगाने के लिए जारी किया। प्रजनक और आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के प्रमुख डॉ. जेपी जायसवाल व डॉ. स्वाति के अनुसार सामान्य जौ छिलके के कारण प्रोसेसिंग के बाद ही इस्तेमाल हो पाता है, जबकि यह सीधे उपयोग में लाई जा सकती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 20-28 है, जो गेहूं (60-70) का करीब एक तिहाई है, और इसमें प्रति सौ ग्राम 5-10 ग्राम तक बीटा ग्लूकन है, इसलिए वैज्ञानिक इसकी रोटी को मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद मानते हैं। फसल 125-135 दिन में तैयार होती है, पौधा मजबूत है और गिरने के प्रति सहनशील है, और यह पीला रतुआ व झुलसा रोग के प्रति रोधी है। किसान मेले के नवाचार स्टॉल पर इसे देखने को भीड़ उमड़ रही है। किसानों को कुछ बीज दिए गए हैं और मांग को देखते हुए विवि बड़े स्तर पर बीज उत्पादन करेगा, ताकि आने वाले किसान मेलों में बीज मिल सके। (स्रोत: अमर उजाला)
यह रिपोर्ट रुद्रपुर सिटी ने जांच के बाद प्रकाशित की है।