किराया और ज़मीन-जायदाद: बुनियादी बातें
Tenancy and property: the basics
लिखित समझौता, किराए की रसीद और पुलिस में किरायेदार सत्यापन: तीन चीज़ें ज़्यादातर विवाद रोक देती हैं। ज़मीन खरीदने से पहले खतौनी और रजिस्ट्री की जांच करें।
क्या करेंSteps
- किराया: लिखित समझौता करें जिसमें किराया, जमा राशि, अवधि, बिजली-पानी और खाली करने का नोटिस साफ़ लिखा हो; दोनों पक्ष एक-एक प्रति रखें।
- एक साल या उससे लंबी अवधि का पट्टा रजिस्ट्रार दफ़्तर में पंजीकृत कराना होता है; 11 महीने के समझौते इसी वजह से चलन में हैं।
- मकान मालिक किरायेदार का सत्यापन उत्तराखंड पुलिस के सिटीजन पोर्टल पर कराएं; किराया देने पर रसीद या बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड रखें।
- विवाद हो तो पहले लिखित नोटिस, फिर लोक अदालत या दीवानी अदालत; ज़बरदस्ती सामान निकालना या ताला लगाना गैरकानूनी है।
- ज़मीन खरीदते समय: भूलेख पर खतौनी देखें, रजिस्ट्रार दफ़्तर से पुरानी रजिस्ट्री और बोझ (ऋण, मुकदमा) की जांच कराएं, रजिस्ट्री के बाद तहसील में दाखिल-ख़ारिज (नामांतरण) कराएं।
क्या साथ ले जाएंWhat to bring
- समझौते की प्रति, किराए की रसीदें, बिजली-पानी के बिल
- खतौनी की नकल, रजिस्ट्री, नक्शा
- पहचान पत्र और पते का प्रमाण
आधिकारिक लिंकOfficial links
भूलेख उत्तराखंड (खतौनी) (नई विंडो में खुलेगा)bhulekh.uk.gov.inकिरायेदार सत्यापन (उत्तराखंड पुलिस) (नई विंडो में खुलेगा)policecitizenportal.uk.gov.inमुफ़्त कानूनी सहायता (DLSA, 15100) (नई विंडो में खुलेगा)uttarakhand.nalsa.gov.in
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गाइड 18 सितंबर 2026 को जांची गई।